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कहने को तो बहुत बड़ी है दुनिया , पर सच यह है कि दुनिया गोल है ! और बहुत छोटी सी , बस एक आसमान की छत ,मेरी बाहें हैँ जो समूची दुनिया को अपनी बाहों में समेट लेने को सदा आतुर रहती हैं .. मानवीय ज्ञान का रहस्य .. बल्कि यूँ कहें कि सारे ब्रम्हाँड को . वसुधैव कुटुम्बकम् का शाश्वत उदघोष हमारी विरासत है ... कुछ अपनी लिखूँगा .. कुछ आपकी सुनूगा इस ब्लाग में , निकल चलेंगे दूर बहुत दूर ......आगे पढ़ें... 

चिड़िया के बच्चो को बड़ा होकर उड़ जाने तक का समय देने की हिदायत मेरे पिताजी ने मुझे दी थी .
शर्मनाक है यह तोड़ फोड़ क. श्रीवास्तव ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर ९४२५८०६२५२ ... vivek ranjan shrivastava द्वारा 14 मई, 2011 2:13:00 PM IST पर पोस्टेड
ई मेल एड्रेस का पंजीकरण कानूनी रूप से जरूरी हो
नव विचार ई मेल एड्रेस का पंजीकरण कानूनी रूप से जरूरी हो इंजी विवेक रंजन श्रीवास्तव ओ बी ११ ... vivek ranjan shrivastava द्वारा 5 मई, 2010 2:37:00 PM IST पर पोस्टेड